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युँही बे सबाब ना फिरा करो

कोई शाम घर भी रहा करो

वो गज़ल की सच्ची किताब है

उसे छुपके-छुपके पड़ा करो

मुझे इश्तिहार सी लगती हैं

ये महोब्बतों की कहनीयाँ

जो सुना नहीं वो कहा करो

जो कहा नहीं वो सुना करो ||

/99Chutkule

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